Income Tax Slab Budget 2026 नई बजट हुआ लागू मिडल क्लास को राहत जाने क्या क्या हुआ सस्ता

Income Tax Slab Budget 2026 : केंद्रीय बजट 2026 देश के करोड़ों करदाताओं के लिए बेहद अहम रहा। हर साल की तरह इस बार भी सबसे ज़्यादा चर्चा इनकम टैक्स स्लैब को लेकर हुई। महंगाई, बढ़ते घरेलू खर्च और सीमित बचत के बीच लोग यह जानना चाहते थे कि क्या सरकार टैक्स स्लैब में कोई राहत देगी। हालांकि बजट 2026 में इनकम टैक्स स्लैब की संरचना को बड़े स्तर पर नहीं बदला गया, लेकिन इससे जुड़े आंकड़े आम आदमी की असल स्थिति को साफ तौर पर दिखाते हैं।

टैक्सपेयर्स से जुड़े अहम आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में करीब 8.5 करोड़ से अधिक इनकम टैक्स रिटर्न हर साल दाखिल किए जाते हैं। इनमें से लगभग 88 प्रतिशत टैक्सपेयर्स नई टैक्स व्यवस्था को चुन रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि नई व्यवस्था में टैक्स दरें सरल हैं और कम आय वर्ग के लिए सीधी छूट मिलती है।

वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 70 प्रतिशत टैक्सपेयर्स की वार्षिक आय 10 लाख रुपये से कम है। ऐसे में टैक्स स्लैब में थोड़ा सा बदलाव भी करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है।

Budget 2026 में लागू टैक्स स्लैब

नए टैक्स स्ट्रक्चर का ढांचा कुछ इस प्रकार हैं –

  • 4 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं
  • 8 लाख रुपये तक की आय पर 5 प्रतिशत टैक्स
  • 12 लाख रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत टैक्स
  • 16 लाख रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत टैक्स
  • 20 लाख रुपये तक की आय पर 20 प्रतिशत टैक्स
  • 24 लाख रुपये तक की आय पर 25 प्रतिशत टैक्स
  • इससे ऊपर की आय पर 30 प्रतिशत टैक्स

आंकड़ों के अनुसार, करीब 3.2 करोड़ टैक्सपेयर्स ऐसे हैं जिनकी आय 12 लाख रुपये के आसपास है। इन्हें टैक्स छूट और स्टैंडर्ड डिडक्शन का सबसे ज़्यादा लाभ मिलता है।

Standard Deduction का असर

बजट 2026 में 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन जारी रखी गई है। इसका सीधा फायदा नौकरीपेशा और पेंशनभोगियों को मिलता है। अगर किसी व्यक्ति की सालाना आय 12.5 लाख रुपये है, तो कटौती के बाद टैक्स योग्य आय कम हो जाती है, जिससे कई मामलों में टैक्स शून्य तक पहुंच सकता है। आंकड़े बताते हैं कि करीब 4 करोड़ सैलरी क्लास टैक्सपेयर्स स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा उठाते हैं।

महंगाई बनाम टैक्स स्लैब

पिछले पांच वर्षों में औसतन खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 30 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च में 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हुई है। इन आंकड़ों की तुलना में टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव न होना मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त दबाव बनाता है।

टैक्स स्लैब सरकार के लिए चुनौती

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजस्व और राहत के बीच संतुलन बनाए रखने की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इनकम टैक्स से सरकार को हर साल करीब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। टैक्स स्लैब में बड़ी छूट देने से इस राजस्व पर सीधा असर पड़ सकता है।

आम टैक्सपेयर्स पर असर

आंकड़ों से साफ है कि टैक्स स्लैब स्थिर रहने से सरकार को राजस्व स्थिरता मिलती है, लेकिन आम टैक्सपेयर्स को तुरंत राहत नहीं मिलती। हालांकि नई टैक्स व्यवस्था की सरलता और छूट ने निचले व मध्यम आय वर्ग को कुछ हद तक सहारा जरूर दिया है।

Conclusion 

Income Tax Slab Budget 2026 में बड़े बदलाव भले ही न किए गए हों, लेकिन इससे जुड़े आंकड़े यह दिखाते हैं कि देश का टैक्स सिस्टम धीरे-धीरे सरल दिशा में बढ़ रहा है। आने वाले समय में यदि महंगाई के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए टैक्स स्लैब में संशोधन किया जाता है, तो यह आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत बन सकता है।

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